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भूत और भविष्य की उलझन

आज हम अपने भविष्य के बारे में हमेशा सोचते रहते है, अपने मन की कल्पनाओ को संजोते है सवारते है और सोचते है की कब हम अपने कल्पना के अनुरूप बन जाएंगे? कभी कभी हम अपने कल्पनाओ में इस कदर डुब जाते है की हम अपनी वास्तविकता को भूल जाते है। हम कहा थे कैसे थे कहा से आये है कैसे आये है वगेरा वगेरा। भुत काल बहुत ही बड़ा हथियार होता है जो हमे अपने जमीनी हकीकत से हमेशा रूबरू कराता है और कहता है की ये मत भूल की तू कहा था कैसा था तेरे साथ क्या क्या हुआ, ये सब भुत है। बिता हुआ कल को हम पा नही सकते है,बिता हुआ कल किसी का अच्छा भी हो सकता है किसी का बुरा भी हो सकता है कोई अपने अच्छे समय को फिर से पाना चाहता है, कोई अपने बुरे समय को दुबारा याद नही करना चाहता है सब की अपनी अपनी भावना है वो कैसे अपने बीते हुए कल को याद करता है। जब भी हम अपने वर्तमान को सुलझाकर अपने भविष्य के बारे में सोचने की कोशिश करता हु तो फिर से उलझ जाता हु। सोचता हु समय कितने तरह से खेल खेलती है, ये समय ही तो है जो कभी भूत की बात को बताती है कभी भविष्य के बात को सोचने के लिए मजबूर करती है और अपने उलझन में फाश लेती है, सुलझने का मौका नही...
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क्रोनोलॉजी :--

देश में CAA_NRC का विरोध हो रहा है। सबको अपना अधिकार है अपनी बात रखने का, मुखर होकर बात रखिये। बात रखते रखते आप चरमपंथ के सहयोगी मत हो जाइये। लोगो की बात सुनकर ही मन में बात और विचार का उत्सर्जन होता है। जो लोग भी अपशब्द भाषा और शब्द का प्रयोग कर रहे है वो क्या अपने आप को मानशिक दिवालियापन के राह पर ले जाने का प्रयाश कर रहा है? आने वाले अपने पीढ़ी को हम कैसी सोच में धकेल रहे है? क्या ऐसी सोच बच्चो में भरने से इन बच्चो का भविष्य प्रकाश की ओर जा रहा है या अंधकार ओर ? इसे हमे सोचना होगा। ये बच्ची जिस प्रकार का शब्द का प्रयोग कर रही है क्या ये सही है? आखिर इसके दिमाग में इतना जहर किसने घोल दिया है? क्या ये इस बच्ची का मानशिक बलात्कार नही है? इसके मानशिक बलात्कार के बलात्कारी इसके माता पिता नही है? हाथ में कागज़ और पेंसिल पकड़ने के उम्र में इनकी हाथ नारे लगाने के लिए खड़ी हो रही है। इन बच्चो के उम्र तो हमे कानून भी कोई चीज़ होता है मुझे नही मालूम था। 👇👇👇

सरकारी शिक्षक

इस देश में सबसे बड़ा कोई कामचोर है तो वो है सरकारी शिक्षक। जिनके कंधे पर देश के भविष्य बनाने का बोझ रहता है। इस देश में सबको पता है की सरकारी शिक्षक देश के सबसे बड़े चोर है। लेकिन इनके खिलाफ बोलने वाला कोई नही है। कुछ तो ऐसे भी शिक्षक है जो निजी विद्यालय में भी पढ़ाते है। ऐसे शिक्षको के पास सरकारी विद्यालय में पढाने का समय नही है लेकिन निजी विद्यालय में पढ़ाने का समय है। जो खुद पैसो के लिए मर रहे हो वो क्या देश की भविष्य को संभालेंगे। सब को सरकारी नौ करी चाहिए लेकिन सरकारी विद्यालय में बच्चे को पढ़ा नही सकते। शिक्षकों अथवा सरकारी कर्मचारी को केवल सुविधाओं की ही इतनी चिंता क्यों होती है, कर्तब्यों की क्यों नही। क्या शिक्षको के बच्चे या पोते पोतियां किसी सरकारी विधालय में पढाई कर रहे हैं? यदि नही तो वेतन और सुविधाओं के लिए शोर मचाना बंद करें। प्राइवेट शिक्षक आपलोगों से ज्यादा मेहनत करते हैं, कम सुविधाएं और वेतन पाते हैं पर वो शिकायत नही करते, हालांकि उनके विधालयों मे सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को भेजना भी पसंद करते हैं। शिक्षा एक अमूल्य दान है और शिक्षण एक बेहद ही सम्माननीय कार्य, परंतु शिक...