आज हम अपने भविष्य के बारे में हमेशा सोचते रहते है, अपने मन की कल्पनाओ को संजोते है सवारते है और सोचते है की कब हम अपने कल्पना के अनुरूप बन जाएंगे? कभी कभी हम अपने कल्पनाओ में इस कदर डुब जाते है की हम अपनी वास्तविकता को भूल जाते है। हम कहा थे कैसे थे कहा से आये है कैसे आये है वगेरा वगेरा।
भुत काल बहुत ही बड़ा हथियार होता है जो हमे अपने जमीनी हकीकत से हमेशा रूबरू कराता है और कहता है की ये मत भूल की तू कहा था कैसा था तेरे साथ क्या क्या हुआ, ये सब भुत है। बिता हुआ कल को हम पा नही सकते है,बिता हुआ कल किसी का अच्छा भी हो सकता है किसी का बुरा भी हो सकता है कोई अपने अच्छे समय को फिर से पाना चाहता है, कोई अपने बुरे समय को दुबारा याद नही करना चाहता है सब की अपनी अपनी भावना है वो कैसे अपने बीते हुए कल को याद करता है।
जब भी हम अपने वर्तमान को सुलझाकर अपने भविष्य के बारे में सोचने की कोशिश करता हु तो फिर से उलझ जाता हु। सोचता हु समय कितने तरह से खेल खेलती है, ये समय ही तो है जो कभी भूत की बात को बताती है कभी भविष्य के बात को सोचने के लिए मजबूर करती है और अपने उलझन में फाश लेती है, सुलझने का मौका नही मिलता है।
आज जो है वो भुत में बनाये और बुने हुए जाल ही तो है जिसे मैं सुलझाने में लगा हुआ हु।इसलिए वर्तमान में जीने की कोशिश कीजिए लेकिन हमेशा अपने बीते हुए कल को याद रखिये नही तो आपका पैर इस धरती से ऊपर उठ जाएगी और आप गिर जाएंगे।
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