देश में CAA_NRC का विरोध हो रहा है। सबको अपना अधिकार है अपनी बात रखने का, मुखर होकर बात रखिये।
बात रखते रखते आप चरमपंथ के सहयोगी मत हो जाइये।
लोगो की बात सुनकर ही मन में बात और विचार का उत्सर्जन होता है। जो लोग भी अपशब्द भाषा और शब्द का प्रयोग कर रहे है वो क्या अपने आप को मानशिक दिवालियापन के राह पर ले जाने का प्रयाश कर रहा है? आने वाले अपने पीढ़ी को हम कैसी सोच में धकेल रहे है? क्या ऐसी सोच बच्चो में भरने से इन बच्चो का भविष्य प्रकाश की ओर जा रहा है या अंधकार ओर ? इसे हमे सोचना होगा।
ये बच्ची जिस प्रकार का शब्द का प्रयोग कर रही है क्या ये सही है? आखिर इसके दिमाग में इतना जहर किसने घोल दिया है? क्या ये इस बच्ची का मानशिक बलात्कार नही है? इसके मानशिक बलात्कार के बलात्कारी इसके माता पिता नही है?
हाथ में कागज़ और पेंसिल पकड़ने के उम्र में इनकी हाथ नारे लगाने के लिए खड़ी हो रही है। इन बच्चो के उम्र तो हमे कानून भी कोई चीज़ होता है मुझे नही मालूम था।
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