इस देश में सबसे बड़ा कोई कामचोर है तो वो है सरकारी शिक्षक। जिनके कंधे पर देश के भविष्य बनाने का बोझ रहता है। इस देश में सबको पता है की सरकारी शिक्षक देश के सबसे बड़े चोर है। लेकिन इनके खिलाफ बोलने वाला कोई नही है। कुछ तो ऐसे भी शिक्षक है जो निजी विद्यालय में भी पढ़ाते है। ऐसे शिक्षको के पास सरकारी विद्यालय में पढाने का समय नही है लेकिन निजी विद्यालय में पढ़ाने का समय है। जो खुद पैसो के लिए मर रहे हो वो क्या देश की भविष्य को संभालेंगे। सब को सरकारी नौकरी चाहिए लेकिन सरकारी विद्यालय में बच्चे को पढ़ा नही सकते।
शिक्षकों अथवा सरकारी कर्मचारी को केवल सुविधाओं की ही इतनी चिंता क्यों होती है, कर्तब्यों की क्यों नही। क्या शिक्षको के बच्चे या पोते पोतियां किसी सरकारी विधालय में पढाई कर रहे हैं? यदि नही तो वेतन और सुविधाओं के लिए शोर मचाना बंद करें। प्राइवेट शिक्षक आपलोगों से ज्यादा मेहनत करते हैं, कम सुविधाएं और वेतन पाते हैं पर वो शिकायत नही करते, हालांकि उनके विधालयों मे सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को भेजना भी पसंद करते हैं।
शिक्षा एक अमूल्य दान है और शिक्षण एक बेहद ही सम्माननीय कार्य, परंतु शिक्षकों प्रोफेसरों के निकम्मेपन की वजह से राज्य के ज्यादातर कॉलेजों और विधालयों से बच्चे नदारद है, सब प्राइवेट शिक्षकों से ट्यूशन पढ़ते हैं और केवल परीक्षा के समय कॉलेज और स्कूल का मुखड़ा देखने जाते हैं। इन सब के लिए जिम्मेदार कौन है?
शिक्षक महोदय राजनीति अन्य लोगों के लिए छोड़ दीजिए आप बस ईमानदारी से अपना काम ही कर लीजिए शायद यह देश, यहां की राजनीति और आपके जीवन की वैतरणी पार लग जायेगी।
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